अन्नपूर्णा रसोई योजना में एआई से फर्जीवाड़ा: 4 रसोइयां सीज, संस्थाएं ब्लैकलिस्ट, 1-1 लाख का जुर्माना
पुराने फोटो से एआई की मदद से बनाए गए नए चित्र, फर्जी कूपन काटकर अनुदान उठाने का प्रयास
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा रसोई योजना में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से किए गए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। झुंझुनूं जिले की चार अन्नपूर्णा रसोइयों में संचालक संस्थाओं द्वारा लाभार्थियों के पुराने फोटो का उपयोग कर नए फोटो तैयार किए गए और फर्जी कूपन काटकर सरकारी अनुदान प्राप्त करने का प्रयास किया गया।
मामले का खुलासा होने के बाद स्वायत्त शासन विभाग (DLB) ने झुंझुनूं नगर परिषद, चिड़ावा, पिलानी तथा बिसाऊ की रसोइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। संबंधित संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करते हुए उनके अनुबंध निरस्त कर दिए गए हैं तथा प्रत्येक पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
एआई टूल से खुला फर्जीवाड़े का राज
डीएलबी निदेशालय के अन्नपूर्णा रसोई प्रकोष्ठ द्वारा की गई जांच में आईटी विशेषज्ञों की टीम ने ऑनलाइन कूपन डेटा तथा पोर्टल पर अपलोड तस्वीरों का एआई टूल्स की सहायता से विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि कई मामलों में पुराने फोटो को संशोधित कर नए लाभार्थियों के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
झुंझुनूं रसोई में दिया गया अजीब तर्क
झुंझुनूं नगर परिषद की रसोई संख्या-1520 का संचालन शहरी आजीविका केंद्र संस्थान द्वारा किया जा रहा था। मार्च माह में बड़ी संख्या में फर्जी कूपन काटे गए। स्पष्टीकरण मांगने पर संस्था ने दावा किया कि कच्ची बस्तियों के लोग प्रतिदिन आते हैं और उनके चेहरे एक जैसे दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों ने फोटो में कपड़ों और अन्य विवरणों के आधार पर इस तर्क को खारिज कर दिया।
चिड़ावा में कहा- लोगों के पास एक ही जोड़ी कपड़े
चिड़ावा की रसोई संख्या-439 का संचालन लक्ष्मी एसएचजी द्वारा किया जा रहा था। अप्रैल माह में फर्जी कूपन काटने का मामला सामने आया। संस्था ने सफाई दी कि भोजन करने आने वाले लोगों के पास एक ही जोड़ी कपड़े हैं, इसलिए तस्वीरें समान दिखाई देती हैं। विभागीय जांच में यह दावा गलत पाया गया।
पिलानी में ऑपरेटर पर डाला दोष
पिलानी नगरपालिका की रसोई संख्या-1271 का संचालन जय माता दी एसएचजी द्वारा किया जा रहा था। यहां मार्च माह में फर्जी कूपन काटे गए। संस्था ने कंप्यूटर ऑपरेटर की गलती का हवाला दिया, लेकिन डीएलबी ने संचालन संस्था को ही जिम्मेदार माना।
बिसाऊ में बड़ा खुलासा: 20 लोग खाते थे, रिकॉर्ड में 195 कूपन
बिसाऊ नगरपालिका क्षेत्र में संचालित अन्नपूर्णा रसोई में जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रसोई में प्रतिदिन केवल 19 से 20 लोग ही भोजन कर रहे थे, जबकि रिकॉर्ड में 190 से 195 कूपन काटे जा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि रसोई की यूजर आईडी का दुरुपयोग कर अन्य शहरों की रसोइयों के नाम पर भी कूपन जारी किए जा रहे थे। इसके बाद नगरपालिका ने रसोई को सीज कर दिया तथा संचालन कर रही श्री अन्नपूर्णा महिला सहकारिता समिति, बालरासर को ब्लैकलिस्ट कर दिया।
15 दिन में नई संस्थाओं का चयन
स्वायत्त शासन विभाग ने संबंधित निकायों को 15 दिनों के भीतर नई संस्थाओं का चयन करने के निर्देश दिए हैं। तब तक भोजन व्यवस्था स्थानीय निकायों की निगरानी में वैकल्पिक रूप से जारी रहेगी।
अधिकारियों के अनुसार जिले में पहली बार एआई तकनीक का उपयोग कर इस प्रकार का हाईटेक फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पूरे प्रदेश में अन्नपूर्णा रसोई योजना की जांच कराई जा रही है।
मुख्य बिंदु
- अन्नपूर्णा रसोई योजना में एआई आधारित फर्जीवाड़ा उजागर।
- 4 रसोइयां सीज और संबंधित संस्थाएं ब्लैकलिस्ट।
- प्रत्येक संस्था पर 1 लाख रुपये का जुर्माना।
- पुराने फोटो से नए फोटो बनाकर फर्जी कूपन काटे गए।
- बिसाऊ में 20 लाभार्थियों के स्थान पर 190-195 कूपन जारी किए गए।
- डीएलबी की आईटी टीम ने एआई टूल से घोटाले का खुलासा किया।
- 15 दिनों में नई संचालन संस्थाओं का चयन किया जाएगा।